अब दूध हो गया महंगा, 102 रुपए में मिलेगा 1 लीटर मिल्क; 1 सितंबर से लागू होंगी नई कीमतें
घरेलू रसोई के मासिक बजट पर एक और बड़ा झटका लगने वाला है। डेयरी संघों और प्रमुख दूध वितरकों ने उत्पादन व परिवहन लागत में वृद्धि के कारण कीमतों में संशोधन की घोषणा कर दी है। प्रीमियम फुल क्रीम दूध अब सीधे ₹102 प्रति लीटर के आंकड़े पर पहुंच गया है।
क्यों बढ़ाई गईं दूध की कीमतें?
डेयरी उद्योग के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में पशु आहार (कैटल फीड), हरे चारे और सूखा चारा की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा डीजल और लॉजिस्टिक्स के बढ़ते खर्चों ने सप्लाई चेन पर गहरा दबाव बनाया है। किसानों और दुग्ध उत्पादकों को राहत देने तथा उनकी उत्पादन लागत की भरपाई करने के उद्देश्य से खरीद मूल्यों में वृद्धि करना अपरिहार्य हो गया था।
| दूध का प्रकार | पुरानी दर | नई दर (1 सितंबर से) |
|---|---|---|
| प्रीमियम फुल क्रीम (भैंस का दूध) | ₹96 / ली. | ₹102 / ली. |
| मानक फुल क्रीम (Standard) | ₹66 / ली. | ₹70 / ली. |
| टोंड दूध (Toned Milk) | ₹54 / ली. | ₹57 / ली. |
| गाय का ताजा दूध (Cow Milk) | ₹56 / ली. | ₹60 / ली. |
आम आदमी के किचन और बाजार पर सीधा असर
दूध की कीमतों में वृद्धि का असर केवल सुबह की चाय या बच्चों के गिलास तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव पनीर, मक्खन, दही, घी, छाछ और मिठाइयों जैसी सभी डेयरी उत्पादों पर पड़ेगा। होटल व्यवसाय, चाय के स्टॉल और बेकरी उत्पादों की लागत में भी इसके चलते इजाफा तय माना जा रहा है। एक मध्यमवर्गीय चार सदस्यीय परिवार के लिए मासिक खर्च में लगभग ₹350 से ₹600 तक की सीधी बढ़ोतरी होगी।
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आगामी त्योहारी सीजन में और चुनौतियां
सितंबर माह के आगमन के साथ ही देश में प्रमुख त्योहारी सीजन जैसे गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली की शुरुआत हो जाती है। ऐसे समय में दूध और खोया/मावा की मांग कई गुना बढ़ जाती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आपूर्ति श्रृंखला में सुधार नहीं हुआ तो आगामी हफ्तों में दूध आधारित अन्य उत्पादों के मूल्यों में एक और तेजी देखी जा सकती है।